February 15, 2026

मुख्यमंत्री धामी के पारदर्शी निर्णय से अंकिता केस में वीआईपी एंगल की जांच को मिली नई रफ्तार।

 

मुख्यमंत्री धामी के पारदर्शी निर्णय से अंकिता केस में वीआईपी एंगल की जांच को मिली नई रफ्तार।

 

 

अंकिता हत्याकांड मामले में Central Bureau of Investigation (सीबीआई) ने अज्ञात वीआईपी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली है। दिल्ली स्थित सीबीआई की क्राइम ब्रांच शाखा संख्या दो में एफआईआर दर्ज होने के बाद, जांच के लिए विशेष टीम देहरादून पहुंच चुकी है और मामले की गहन विवेचना शुरू कर दी गई है।
यह मामला सितंबर 2022 का है, जब पौड़ी जिले की निवासी और वनांतरा रिसोर्ट में कार्यरत अंकिता की हत्या कर दी गई थी। इस प्रकरण में 30 मई 2024 को जिला न्यायालय ने रिसोर्ट मालिक पुलकित आर्य सहित तीनों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। जांच के दौरान यह भी सामने आया था कि अंकिता पर एक वीआईपी को “विशेष सेवा” देने का दबाव बनाया गया था, हालांकि एसआईटी जांच में उस वीआईपी की पहचान उजागर नहीं हो सकी थी।
मामले में बड़ा मोड़ तब आया, जब बीते दिनों पूर्व विधायक सुरेश राठौर और उर्मिला सनावर के वायरल ऑडियो के बाद विवाद गहराया और प्रदेशभर में प्रदर्शन हुए। इसी बीच अंकिता के माता-पिता ने माननीय मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी जी से निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग करते हुए सीबीआई जांच की अपील की। इस मांग को गंभीरता से लेते हुए सीएम धामी जी ने 9 जनवरी को औपचारिक रूप से सीबीआई जांच की सिफारिश की, जिसके तहत अब एजेंसी ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
सीबीआई जांच की सिफारिश के बाद विपक्ष की ओर से यह कहकर हो-हल्ला भी मचाया गया था कि यह आदेश केवल आंदोलन को शांत करने के लिए दिए गए हैं। लेकिन अब एफआईआर दर्ज होने और जांच औपचारिक रूप से शुरू होने के बाद सरकार का कहना है कि इस कदम से न केवल मामले की निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित हुई है, बल्कि विपक्ष के आरोपों को भी करारा जवाब मिला है।
अब पूरे प्रदेश की निगाहें सीबीआई की जांच पर टिकी हैं—क्या अज्ञात वीआईपी की पहचान सामने आएगी और क्या अंकिता को न्याय की पूरी तस्वीर मिलेगी, यह आने वाले दिनों में साफ होगा।

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