धामी सरकार का ऐतिहासिक फैसला: आज खत्म होगा मदरसा बोर्ड, 1 जुलाई से अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण संभालेगा जिम्मेदारी

उत्तराखंड मदरसा बोर्ड का आज आखिरी दिन हैं इसके साथ पर कल से उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण अस्तित्व में आ जाएगा। राज्य के सभी 452 मदरसों को उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण से मान्यता लेनी है।
*प्रत्येक मान्यता तीन शैक्षणिक वर्षों के लिए वैध होगी*
। इसके अलावा मदरसों को उत्तराखंड शिक्षा बोर्ड से विधिवत संबद्धता भी प्राप्त करनी होगी। प्राधिकरण मदरसों का भौतिक निरीक्षण करेगा
*प्राधिकरण की नियमावली के अंतर्गत मुस्लिम, ईसाई, सिख, बौद्ध, जैन एवं पारसी समुदायों को अल्पसंख्यक समुदाय के रूप में मान्यता दी गई है*
*मदरसों को निर्धारित सरकारी पोर्टल पर आनलाइन आवेदन करना है एवं आवश्यक दस्तावेज़ एवं शुल्क जमा करना है*
*आवेदन की समीक्षा में संस्थान की अल्पसंख्यक पहचान, भूमि स्वामित्व, वित्तीय स्थिति, स्टाफ योग्यता एवं सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की प्रतिबद्धता का परीक्षण शुरू होगा*
नियमों के उल्लंघन पर मदरसों की मान्यता भी निरस्त होगी।
*मुख्यमंत्री धामी की अध्यक्षता में बीते 14 मई को मंत्रिमंडल ने उत्तराखंड अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान संबंधी मान्यता नियमावली-2026 को औपचारिक स्वीकृति प्रदान की थी*
*जिसके बाद मदरसा बोर्ड को एक जुलाई, 2026 से विधिवत रूप से समाप्त करने की सिफारिश की गई*
वही मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि हमारी सरकार प्रदेश के प्रत्येक नागरिक के शैक्षणिक अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। मदरसा बोर्ड के स्थान पर बुधवार से अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण अस्तित्व में आ जाएगा, नई नियमावली से शैक्षणिक संस्थानों के संचालन में पारदर्शिता, जवाबदेही एवं गुणवत्ता सुनिश्चित होगी।’

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मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल भवन और सड़कें बनाना नहीं, बल्कि ऐसा चम्पावत विकसित करना है जहाँ युवाओं को अवसर, महिलाओं को आत्मनिर्भरता, किसानों को समृद्धि, व्यापारियों को नए अवसर तथा प्रत्येक नागरिक को विकास का समान लाभ मिले।