धामी कैबिनेट का फैसला : आबकारी नीति में 6 प्रतिशत दर लागू करने का निर्णय, राजस्व बढ़ाने की तैयारी

देहरादून: मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल बैठक में राज्य के विकास, प्रशासनिक सुधार और जनहित से जुड़े कुल 18 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। कैबिनेट के फैसलों में कुंभ मेला व्यवस्थाओं से लेकर शिक्षा, परिवहन, वन और उद्योग क्षेत्रों तक कई बड़े निर्णय शामिल हैं।
कैबिनेट ने कुंभ मेले से जुड़े कार्यों की स्वीकृति प्रक्रिया को सरल करते हुए तय किया कि 1 करोड़ रुपये तक के कार्य मेला अधिकारी, 5 करोड़ तक गढ़वाल आयुक्त और इससे अधिक के कार्य शासन स्तर से स्वीकृत होंगे। इससे कार्यों में तेजी आने की उम्मीद है।
परिवहन विभाग को 250 नई बसें खरीदने की मंजूरी दी गई है। वहीं जीएसटी दर में कमी का लाभ लेते हुए अब 100 के बजाय 109 अतिरिक्त बसें खरीदी जाएंगी, जिससे सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था मजबूत होगी।
उद्योग विभाग में दर को 7 रुपये प्रति कुंतल से बढ़ाकर 8 रुपये प्रति कुंतल किया गया है। वहीं आबकारी नीति के तहत 6 प्रतिशत दर को अपनाने का निर्णय लिया गया।
वन विभाग में भर्ती नियमों में बदलाव करते हुए वन दरोगा की आयु सीमा 21 से 35 वर्ष और वन आरक्षी की 18 से 25 वर्ष तय की गई है। इसके साथ ही वन क्षेत्र की सीमाओं पर मधुमक्खी पालन नीति को मंजूरी दी गई है, जिससे स्थानीय रोजगार को बढ़ावा मिलेगा।
कैबिनेट ने डी श्रेणी ठेकेदारों की कार्य सीमा 1 करोड़ से बढ़ाकर 1.5 करोड़ रुपये कर दी है, जिससे छोटे ठेकेदारों को अधिक अवसर मिलेंगे।
शिक्षा क्षेत्र में बड़ा निर्णय लेते हुए कक्षा 1 से 8 तक के 452 मदरसों की मान्यता अब जिला स्तर से दी जाएगी, जबकि 9वीं से 12वीं तक के मदरसों को उत्तराखंड बोर्ड से मान्यता लेनी होगी। साथ ही उत्तराखंड अल्पसंख्यक अधिनियम 2025 को अधिसूचित किए जाने की जानकारी भी दी गई।
इसके अलावा कैबिनेट ने प्रतीक्षा सूची की वैधता एक वर्ष करने, विशेष शिक्षा शिक्षकों की नियमावली और शैक्षिक संवर्ग नियमावली को मंजूरी, तथा लोक निर्माण विभाग में पद सृजन के प्रस्ताव को हरी झंडी दी।
बैठक में वर्कचार्ज कर्मचारियों से जुड़े मामले पर हाईकोर्ट के स्टे की जानकारी भी साझा की गई। वहीं मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा शोध प्रोत्साहन योजना का दायरा बढ़ाकर अब 21 अशासकीय कॉलेजों तक कर दिया गया है।
कुल मिलाकर, धामी कैबिनेट के ये फैसले प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने, रोजगार सृजन और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में अहम माने जा रहे हैं।

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